Tuesday, November 20, 2018

लड़की ने कानूनी लड़ाई जीतकर अब की पसंद से शादी

बाल विवाह के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़कर अपनी मर्जी से शादी करने वाली एक लड़की की इन दिनों पानीपत में काफी चर्चा हो रही है। दरअसल, 18 साल की शशि की आठ पहले शादी कर दी गई थी। करीब डेढ़ साल पहले ससुराल पक्ष के लोग उसे लेने आए तो उसने जाने से मना कर दिया। इसके बाद मामला कोर्ट में गया। कानूनी लड़ाई लड़ी। फिर सोमवार को अपने पसंद के लड़के से शादी की। इस दौरान शशि का इस लड़ाई में पूरे परिवार ने साथ दिया।

दरअसल, 2008 में परिवार वालों ने शशि की शादी इसलिए कर दी क्योंकि घर में उसके चाचा का रिश्ता कहीं पक्का नहीं हो रहा था। इसलिए बीच का रास्ता निकाला गया और चाचा के साथ होने वाली लड़की के भाई से शशि का रिश्ता पक्का किया गया। तब शशि की उम्र महज आठ साल थी। 

शशि ने कहा- मुझे और मेरे परिवार को परेशान किया गया

"मेरी शादी मेरी मर्जी के खिलाफ उस वक्त की गई थी जब में बहुत छोटी थी। मैं तो तब इसके मायने भी नहीं जानती थी, लेकिन बदलते वक्त के साथ पता चल गया था कि मेरा बाल विवाह हुआ था,जिसकी चर्चा भी मुझे पसंद नहीं थी।"
" मैं पिछले साल 11वीं में थी, तभी मेरे स्कूल में बाल विवाह पर सेमिनार हुआ, जिसमें बताया गया कि बाल विवाह कुप्रथा है। इसको तोड़ा भी जा सकता है। तभी तय कर लिया कि उस शादी को नहीं मानूंगी। कुछ ही दिन बाद ससुराल वाले भी अपने घर ले जाने के लिए दबाव बनाने लगे। पर मैंने अपने पिता से साफ कह दिया कि मैं  नहीं जाऊंगी।"

शशि ने बताया- लोगों ने कई बार डराया, धमकाया

“मार्च 2017 में पिता के साथ जाकर महिला संरक्षण एवं बाल विवाह में शिकायत की। ससुराल वालों को बुलाया गया, लेकिन वे नहीं माने। मई 2017 में कोर्ट में शादी खत्म करने के लिए केस दायर किया। 14 माह की लड़ाई के बाद 16 जुलाई 2018 को कोर्ट ने बाल विवाह मानते हुए शादी को रद्द कर दिया।"
"कानूनी लड़ाई लड़ने के दौरान कई तरह से दबाव डाले गए। मेरी चाची को तो उसके मायके वाले यह कह कर वापस ले गए कि जब तक मैं नहीं जाऊंगी तब तक वह उसे भेजेंगे नहीं। चाचा से रिश्ता तोड़ने तक की बात कही गई।”
मेरे पिता के करनाल स्थित घर पर मुझे ससुराल भेजने के लिए पंचायत हुई। मैंने पंचायत की नहीं मानी तो परिवार को समाज से बेदखल कर दिया गया। पुस्तैनी जमीन को भी हड़प लिया गया। इस पूरी लड़ाई में पिता ने पूरा साथ दिया।”

Friday, November 2, 2018

चुनाव से पहले वसुंधरा को SC से झटका, जमीन मामले में भेजा नोटिस

राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके बेटे दुष्यंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस पहुंचा है.

राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. 2010 में नेशनल हाइवे के लिए जमीन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वसुंधरा और उनके बेटे दुष्यंत सिंह को नोटिस जारी किया गया है.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिकाकर्ता ने अपील की थी कि वसुंधरा राजे और उनके बेटे दुष्यंत के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाए. अब इसी को लेकर सर्वोच्च अदालत ने नोटिस जारी किया है.

गौरतलब है कि राजस्थान में कुछ ही समय में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने वाला है. ऐसे में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का ये नोटिस विपक्ष को एक नया मुद्दा दे सकता है. कांग्रेस पहले ही वसुंधरा राजे पर कई आरोप लगा रही है.

आपको बता दें कि राजस्थान की सभी 200 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 7 दिसंबर को मतदान होना है. जबकि नतीजे 11 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे

क्या है पूरा मामला?

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वसुंधरा और दुष्यंत ने धौलपुर के पास एक जमीन को गैरकानूनी रूप से अपना होने का दावा किया. इस जमीन को करीब 1.97 करोड़ रुपये में NHAI को बेच दिया. ये जमीन NHAI द्वारा 2010 में NH-3 को चौड़ा करने के लिए खरीदी गई थी.

किस दल ने क्या कहा?

राकेश सिन्हा के इस बिल पर शिवसेना का कहना है कि अगर इस प्रकार का बिल संसद में पेश किया जाता है तो वह समर्थन करेंगे. वहीं समाजवादी प्रवक्ता जूही सिंह का कहना है कि अगर कोई सांसद प्राइवेट बिल ला रहा है तो क्या बीजेपी और आरएसएस का बतौर संगठन ये मुद्दा खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि हमारा स्टैंड साफ है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसला का इंतजार करेंगे और वही मानेंगे.

'बिना देरी किए शुरू हो मंदिर निर्माण'

बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया. उन्होंने कहा कि कोर्ट के निर्णय का इंतजार किए बिना मंदिर निर्माण शुरू कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रश्न है, पानी सर से उतर चुका है. मामला सुप्रीम कोर्ट में है और देर से हुआ न्याय भी किसी अन्याय से कम नहीं हुआ करता.

संघ की बैठक में गूंजा राम मंदिर

गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तरफ से लगातार केंद्र की मोदी सरकार पर राम मंदिर निर्माण को लेकर दबाव बनाया जा रहा है. महाराष्ट्र में चल रही संघ की बैठक में भी इस मुद्दे पर मंथन हुआ.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बुधवार को अयोध्या में भव्य राम मंदिर के शीर्घ निर्माण के लिए अध्यादेश लाने या कानून बनाने की अपनी मांग को दोहराया. आरएसएस के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण राष्ट्रीय गौरव का विषय है और अभी तक अयोध्या विवाद का हल अदालतों में नहीं निकला है.

डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि अब सरकार को चाहिए कि राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण कर काम शुरू किया जाए और राष्ट्र के गौरव को बहाल करना चाहिए. वैद्य की यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल के मद्देनजर आई है जिसका उद्घाटन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने किया था.