राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनके बेटे दुष्यंत सिंह को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस पहुंचा है.
राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. 2010 में नेशनल हाइवे के लिए जमीन देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने वसुंधरा और उनके बेटे दुष्यंत सिंह को नोटिस जारी किया गया है.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी. याचिकाकर्ता ने अपील की थी कि वसुंधरा राजे और उनके बेटे दुष्यंत के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज की जाए. अब इसी को लेकर सर्वोच्च अदालत ने नोटिस जारी किया है.
गौरतलब है कि राजस्थान में कुछ ही समय में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान होने वाला है. ऐसे में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का ये नोटिस विपक्ष को एक नया मुद्दा दे सकता है. कांग्रेस पहले ही वसुंधरा राजे पर कई आरोप लगा रही है.
आपको बता दें कि राजस्थान की सभी 200 विधानसभा सीटों पर एक चरण में 7 दिसंबर को मतदान होना है. जबकि नतीजे 11 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वसुंधरा और दुष्यंत ने धौलपुर के पास एक जमीन को गैरकानूनी रूप से अपना होने का दावा किया. इस जमीन को करीब 1.97 करोड़ रुपये में NHAI को बेच दिया. ये जमीन NHAI द्वारा 2010 में NH-3 को चौड़ा करने के लिए खरीदी गई थी.
किस दल ने क्या कहा?
राकेश सिन्हा के इस बिल पर शिवसेना का कहना है कि अगर इस प्रकार का बिल संसद में पेश किया जाता है तो वह समर्थन करेंगे. वहीं समाजवादी प्रवक्ता जूही सिंह का कहना है कि अगर कोई सांसद प्राइवेट बिल ला रहा है तो क्या बीजेपी और आरएसएस का बतौर संगठन ये मुद्दा खत्म हो गया है. उन्होंने कहा कि हमारा स्टैंड साफ है कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसला का इंतजार करेंगे और वही मानेंगे.
'बिना देरी किए शुरू हो मंदिर निर्माण'
बीजेपी सांसद साक्षी महाराज ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया. उन्होंने कहा कि कोर्ट के निर्णय का इंतजार किए बिना मंदिर निर्माण शुरू कर देना चाहिए. उन्होंने कहा कि ये करोड़ों हिंदुओं की आस्था का प्रश्न है, पानी सर से उतर चुका है. मामला सुप्रीम कोर्ट में है और देर से हुआ न्याय भी किसी अन्याय से कम नहीं हुआ करता.
संघ की बैठक में गूंजा राम मंदिर
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की तरफ से लगातार केंद्र की मोदी सरकार पर राम मंदिर निर्माण को लेकर दबाव बनाया जा रहा है. महाराष्ट्र में चल रही संघ की बैठक में भी इस मुद्दे पर मंथन हुआ.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बुधवार को अयोध्या में भव्य राम मंदिर के शीर्घ निर्माण के लिए अध्यादेश लाने या कानून बनाने की अपनी मांग को दोहराया. आरएसएस के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य ने कहा कि राम मंदिर का निर्माण राष्ट्रीय गौरव का विषय है और अभी तक अयोध्या विवाद का हल अदालतों में नहीं निकला है.
डॉ. मनमोहन वैद्य ने कहा कि अब सरकार को चाहिए कि राम मंदिर के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण कर काम शुरू किया जाए और राष्ट्र के गौरव को बहाल करना चाहिए. वैद्य की यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारिणी मंडल के मद्देनजर आई है जिसका उद्घाटन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने किया था.
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